Wednesday, February 2, 2011

...जब मोदी के ‘मकड़जाल’ में फंस गए चिदंबरम


नई दिल्ली आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एजेंडे को ही एक नई शक्ल दे दी। उन्होंने सरकार को नक्सली हिंसा, काला धन और राज्यों को हथियार देने तक के मुद्दों पर इस तरह घेरा कि गृह मंत्री पी चिदंबरम को उनका सिलसिलेवार जवाब देना पड़ा। 

इससे यह सम्मेलन अंत में मोदी बनाम चिदंबरम हो गया। मोदी ने अपने आरोपों से सरकार को किस तरह परेशान किया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गृह मंत्री ने उन्हें यह सलाह भी दे दी कि जो समस्या उनके राज्य में नहीं है उस पर वे न बोलें तो अच्छा है। 

मोदी ने केंद्र सरकार को नक्सल समस्या पर घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा है कि पिछले साल नक्सल अभियान में कम जवानों की मौत हुई जबकि आम नागरिक ज्यादा हताहत हुए। मोदी ने कहा, ‘सरकार को इस पर गर्व नहीं करना चाहिए। यह हमारी जीत नहीं है। यह नक्सलियों की विजय है। 

वह पहले से ज्यादा ताकतवर तो हुए ही हैं, खुफिया सूचना जुटाने की उनकी क्षमता में भी इजाफा हुआ है। वे यह जान गए हैं कि कम हमले करके भी कैसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है।’ मोदी ने इसके साथ ही केंद्र को जर्मनी व ऑस्ट्रिया की ओर से पंजाब, आंध्र प्रदेश, ओडीशा, जम्मू-कश्मीर और गुजरात को हथियारों की सप्लाई न किए जाने के मामले पर भी निशाने पर लिया। 

मोदी ने कहा कि इन दोनों देशों ने कहा कि इन पांच राज्यों में पुलिस मानवाधिकार नियमों के खिलाफ काम करती है। इससे वे उन्हें हथियार नहीं बेचेंगे। मोदी ने कहा कि इन देशों के इस बयान के बाद इन्हें काली सूची में डालने की जगह उल्टे केंद्र सरकार ने राज्यों को सलाह दी कि वह अमेरिका, तुर्की व अन्य देशों से हथियार खरीदें। 

मोदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने काले धन पर भी सरकार को घेरा और कहा कि सम्मेलन के एजेंडा पत्र में राज्यों से कहा गया है कि मनी-लॉड्रिंग पर सख्त कदम उठाए। लेकिन जब विदेशों-स्विस बैंक में जमा काले धन की बात की जाती है तो केंद्र सरकार कहती है कि वह टैक्स चोरी का मामला है। 

मोदी ने कहा, ‘सरकार को चाहिए कि वह राज्यों को सलाह देने से पहले अपने स्तर पर उस पर अमल करें।’ नरेंद्र मोदी के इन आरोपों के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आम लोगों की मौत को लेकर संवेदना जताई थी और नक्सल समस्या से सख्ती से निपटने का आहवान भी किया था। ऐसे राज्य जहां नक्सल समस्या नहीं है, वह इसकी गंभीरता नहीं समझ सकते हैं। उन्हें चाहिए कि वह इन मामलों में अपनी सलाह ना दें। 

गृह मंत्री ने कहा कि जहां तक जर्मनी-ऑस्ट्रिया से हथियारों की खरीदारी का मामला है तो अन्य देशों से खरीदारी की सलाह इसलिए दी गई थी कि राज्य उन देशों से हथियार खरीद सकें। इसकी वजह से उनकी पुलिस आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रभावित न हों। चिदंबरम ने मनी-लॉड्रिंग पर कहा कि एजेंडा पेपर में ऐसा कोई बिंदु नहीं है। हालांकि चिदंबरम के ऐसा कहने के बाद एक बार फिर मोदी ने उन अध्याय के नंबर सार्वजनिक करके केंद्र सरकार को कठघरे मंे खड़ा करने का प्रयास किया जिसमें मनी-लॉड्रिंग विषय शामिल था

2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाला: पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा गिरफ्तार

नई दिल्‍ली. 2 जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले के आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को सीबीआई ने आज आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। राजा के पूर्व सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनमें पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरिया और निजी सचिव आर के चंदोलिया को भी गिरफ्तार किया गया है। राजा के भाई के. पेरूमल पर भी सीबीआई ने शिकंजा कसा है। 

इससे पहले राजा सीबीआई के सवालों का जवाब देने के लिए बुधवार सुबह सीबीआई मुख्यालय पहुंचे। इस हफ्ते राजा से यह  दूसरी बार पूछताछ की गई। इससे पहले उनसे 24 और 25 दिसम्बर को भी पूछताछ की गई थी। दूरसंचार मंत्रालय में हुई इस गड़बड़ी का खुलासा करीब तीन महीने पहले हुआ था।

डीएमके नेता राजा के कार्यकाल के दौरान 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को राजस्व का भारी नुकसान होने का आरोप है। काफी हो हल्‍ले के बाद नवम्बर में राजा ने कैबिनेट से इस्तीफा भी दिया था। हालांकि वह आवंटन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार करते रहे हैं।

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में हुई गड़बडि़यों की जांच के लिए गठित पाटिल कमेटी ने सीधे तौर पर टेलिकॉम विभाग (डॉट) के सात अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। इस मामले में पूर्व मंत्री ए. राजा की भूमिका पर यह कहते हुए सवालिया निशान लगाया गया कि राजा ने स्पेक्ट्रम आवंटन में पुरानी नीति पर ज्यादा विचार-विमर्श नहीं किया और उसे जल्दबाजी में लागू कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस शिवराज पाटिल ने पिछले दिनों यह रिपोर्ट दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को सौंपी।

सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर नजर रखे हुए है। मामले की छानबीन के बाद सीबीआई को 10 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के सामने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है। 
सीबीआई के हाथ लगे थे अहम सबूत 

गत दिसम्‍बर में सीबीआई ने राजा के नई दिल्‍ली और चेन्‍नई स्थित आवासों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच एजेंसी के हाथ अहम दस्‍तावेज लगे। हजारों करोड़ रुपये के घोटाला मामले में राजा के परिजनों के घर छापेमारी के दौरान पूर्व मंत्री के खिलाफ अहम सबूत हाथ लगे जिनके आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाया जा सकता है।

इस मामले में कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की राजा के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के मद्देनजर भी राजा से पूछताछ की गई। इस मामले में सीबीआई ने अक्टूबर, 2009 में एफआईआर दर्ज की थी और उसके बाद तलाशी के दौरान जो दस्तावेज बरामद किए गए थे, उन दस्तावेजों के साथ ही राजा का आमना सामना करवाया गया है। 

'बहुत देर हो गई'  

प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने राजा की गिरफ्तारी को देरी से उठाया गया कदम करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि राजा की गिरफ्तारी का श्रेय सरकार को नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट को दिया जाता है। भाजपा ने कहा कि राजा की गिरफ्तारी के बावजूद वह इस मामले की जांच जेपीसी से कराने की अपनी मांग पर कायम है।

कांग्रेस ने राजा की गिरफ्तारी पर कहा कि वह 2 जी घोटाले में चल रही जांच में किसी तरह का दखल नहीं करेगी। पार्टी ने यह भी साफ किया कि राजा की गिरफ्तारी से कांग्रेस और डीएमके के रिश्‍ते पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

घोटाले का ए टू जेड

सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला करीब 1.77 लाख करोड़ रुपए का है। सीएजी ने यह आंकड़ा निकालने के लिए 3जी स्पेक्ट्रम आवंटन और मोबाइल कंपनी एस-टेल के सरकार को दिए प्रस्तावों को आधार बनाया है।

दूरसंचार की रेडियो किरणों को सरकार नियंत्रित करती है और अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ से तालमेल बनाकर काम करती है। विश्व में आई मोबाइल क्रांति के बाद कई कंपनियों ने इस क्षेत्र में प्रवेश किया। सरकार ने हर कंपनी को फ्रिक्वेंसी रेंज याने स्पेक्ट्रम का आवंटन कर लायसेंस देने की नीति बनाई।उन्नत तकनीकों के हिसाब से इन्हें पहली जनरेशन(पीढ़ी) याने 1जी, 2 जी और 3जी का नाम दिया गया। हर नई तकनीक में ज्यादा फ्रिक्वेंसी होती हैं और इसीलिए टेलीकॉम कंपनियां सरकार को भारी रकम देकर फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम के लायसेंस लेती हैं।

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा ने 2008 में नियमों के उल्लंघन करते हुए 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन किया। इसके लिए उनके विभाग ने 2001 में आवंटन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को आधार बनाया, जो काफी पुरानी थी। उन्होंने इसके लिए बिना नीलामी के पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर आवंटन किए। इससे 9 कंपनियों को काफी लाभ हुआ। प्रत्येक को केवल 1651 करोड़ रुपयों में स्पेक्ट्रम आवंटित किए गए जबकि हर लायसेंस की कीमत 7,442 करोड़ रुपयों से 47,912 करोड़ रुपए तक हो सकती थी।

हालांकि दूरसंचार विभाग ने पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटन किए, लेकिन इसमें भी अनियमितताएं कर, कुछ कंपनियों को सीधा लाभ पहुंचाया। कुल 122 लायसेंस में से 85 अयोग्य और अपात्र कंपनियों को दिए गए। लायसेंस आवंटन में कानून मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के सुझावों को भी दरकिनार कर दिया गया।सीएजी ने 1.77 लाख करोड़ का आंकड़ा निकालने के लिए दो तथ्यों को आधार बनाया। उन्होंने इस साल 3जी आवंटन में मिली कुल रकम और 2007 में एस-टेल कंपनी द्वारा लायसेंस के लिए सरकार को दिए प्रस्ताव के आधार पर यह नतीजा निकाला। 

सीएजी के अनुसार 122 लायसेंस के आवंटन में सरकार को जितनी रकम मिली, उससे 1.77 लाख करोड़ रुपए और मिल सकते थे। इसीलिए यह घोटाला 1.77 लाख करोड़ रुपयों का माना गया। 

Tuesday, February 1, 2011

परमाणु क्षमता में ब्रिटेन को पीछे छोड़ा पाक!

वाशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा के वर्ष 2009 में सत्ता संभालने के बाद से पाकिस्तान निरंतर परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। स्थिति यह है कि पाकिस्तान जल्द ही ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी परमाणु ताकत बन जाएगा।
समाचार पत्र 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की नई खुफिया रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है कि बराक ओबामा के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान ने तेजी से अपनी परमाणु क्षमता का विस्तार किया है। वह ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं बड़ी परमाणु शक्ति बनने की ओर अग्रसर है।
एक अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान के अभी ही इतने परमाणु हथियार हो चुके हैं कि वह भारत का प्रभावी ढंग से प्रतिरोध कर सकता है। अखबार के अनुसार पाकिस्तान के संदर्भ में अगर ये आंकड़े सही हैं तो पाकिस्तान लंबे समय तक एक परमाणु ताकत के रूप में स्थापित रह सकता है। मौजूदा समय में अमेरिका, रूस और चीन विश्व की तीन शीर्ष परमाणु ताकते हैं।
इस संबंध में अमेरिका के विदेश मंत्री पी जे क्राउले ने संवाददाताओं से कहा कि ये आंकड़े गैर सरकारी संगठन की ओर से आए हैं। हम परमाणु मुद्दों विशेषत: पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर टिप्पणी नहीं करते

न्यायिक सक्रियता के निहितार्थ

Source: श्रवण गर्ग   |   Last Updated 00:11(01/02/11)
 
 
 
 
 
 
ऐसा महसूस हो रहा है कि देश को इस समय कोई जनता के द्वारा चुनी गई सरकार नहीं बल्कि न्यायपालिका चला रही है। सरकार नाम की कोई ताकत सत्ता में है और देश का कामकाज भी निपटा रही है ऐसा लगना काफी पहले से बंद हो चुका है। ऐसा महसूस होने देने के पीछे भी सरकार का ही हाथ है। जनता देख रही है कि देश की सेहत से जुड़े अहम मामलों पर फैसले करने अथवा सलाह देने का काम न्यायपालिका के हवाले हो गया है और सरकार अदालती कठघरों में खड़ी सफाई देती हुई ही नजर आती है। संसद ठप-सी पड़ी है और सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता बढ़ गई है। बहस का विषय हो सकता है कि क्या यह स्थिति किसी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित और फायदेमंद है। ऐसा कौन सा मुद्दा है जो आज सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर फैसले के लिए गुहार नहीं लगा रहा है? और सवाल यह भी है कि इन मुद्दों में कौन-सा ऐसा है जिस पर सरकार स्वयं कोई न्यायोचित फैसला नहीं ले सकती है? एक वक्त था जब बहस इस बात पर चलती थी संसद की सत्ता सर्वोच्च है या न्यायपालिका की?

केशवानंद भारती केस में न्यायपालिका की व्यवस्था के बाद सालों साल इस पर बहस भी चली। संसद और न्यायपालिका के बीच अधिकार-क्षेत्र को लेकर कई बार टकराव की स्थितियां भी बनीं। पर आज के हालात देखकर लगता है कि न तो सरकार ही और न ही जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही इतनी दयनीय स्थिति में पहले कभी देखे गए। ऐसे हालात तभी बनते हैं जब सरकार का अपनी ही संस्थाओं पर नियंत्रण खत्म होता जाता है या फिर उसका अपनी जनता पर से भरोसा उठ जाता है। सत्ता में काबिज लोगों को ऐसा आत्मविश्वास होने लगता है कि सबकुछ ठीकठाक चल रहा है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। न तो कोई अव्यवस्था है और न ही कोई भ्रष्टाचार, विपक्षी दलों द्वारा जनता को जान-बूझकर गुमराह किया जा रहा है। दूरसंचार घोटाले पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को लेकर कपिल सिब्बल जैसे जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री द्वारा किया गया दावा और उस पर न्यायपालिका सहित देशभर में हुई प्रतिक्रिया इसका केवल एक उदाहरण है। विभिन्न मुद्दों पर सरकार द्वारा व्यक्त प्रतिक्रिया ठीक उसी प्रकार से है जैसे भयाक्रांत सेनाएं मैदान छोड़ने से पहले सारे महत्वपूर्ण ठिकानों को ध्वस्त करने लगती हैं।

आश्चर्यजनक नहीं कि एक अंग्रेजी समाचार पत्र द्वारा वर्ष 2011 के लिए देश के सर्वशक्तिमान सौ लोगों की जो सूची प्रकाशित की गई है उसमें पहले स्थान पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसएच कापड़िया को रखा गया है। दूसरा स्थान कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को और तीसरा एक सौ बीस करोड़ की आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को प्रदान किया गया है। इस क्रम पर अचंभा भी व्यक्त किया जा सकता है और जिज्ञासा भी प्रकट की जा सकती है। बताया गया है कि मुख्य न्यायाधीश के रूप में श्री कापड़िया आज सुप्रीम कोर्ट की ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक ऐसे वक्त जब राजनीति का निर्धारण न्यायपालिका के फैसलों/टिप्पणियों से हो रहा है, नंबर वन न्यायाधीश और उनकी कोर्ट देश का सबसे महत्वपूर्ण पंच बन गई है। अयोध्या मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित फैसले को लेकर जब राजनीति की सांसें ऊपर-नीचे हो रही थीं, बहसें सुनने के बाद उन्होंने यह निर्णय देने में एक मिनट से कम का समय लगाया कि हिंसा फैलने की आशंकाओं को बहाना नहीं बनने दिया जाना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय को अपना फैसला सुनाना चाहिए।

चिंता का मुद्दा यहीं तक सीमित नहीं है कि राष्ट्रमंडल खेलों में सरकार की नाक के ठीक नीचे हुए भ्रष्टाचार से लेकर विदेशों में जमा काले धन की वापसी के सवाल तक पिछले महीनों के दौरान जितने भी विषय उजागर हुए उन सबमें सच्चाई सामने आने की संभावनाएं न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद ही प्रकट हुईं और ऐसा कोई आश्वासन नहीं है कि जो सिलसिला चल रहा है वह कहीं पहुंचकर रुक जाएगा।

क्या ऐसी आशंका को पूर्णत: निरस्त किया जा सकता है कि लगातार दबाव में घिरती हुई कार्यपालिका किसी मुकाम पर पहुंचकर न्यायपालिका के फैसलों को चुनौती देने, उन्हें बदल देने या उन पर अमल को टालने की गलियां तलाश करने लगे। या फिर न्यायपालिका पर राजनीतिक आरोप लगाए जाने लगें कि वह शासन के कामकाज में हस्तक्षेप करते हुए अग्रसक्रिय (प्रोएक्टिव) होने का प्रयास कर रही है, टकराव की स्थिति इससे भी आगे जा सकती है। ऐसा अतीत में हो चुका है।

अक्टूबर 2009 में जब इटली की 15 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने व्यवस्था दी कि वहां की संसद द्वारा पूर्व में पारित कानून, जिससे प्रधानमंत्री को उनके खिलाफ चलाए जाने वाले मुकदमों के प्रति सुरक्षा (इम्यूनिटी) प्राप्त होती है असंवैधानिक है तो भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे सिल्वियो बलरूस्कोनी ने निर्णय को यह कहते हुए चुनौती दे दी कि संवैधानिक पीठ पर वामपंथी जजों का आधिपत्य है। उन्होंने कहा कि ‘कुछ नहीं होगा, हम ऐसे ही चलेंगे।’ उन्होंने कोर्ट को ऐसी राजनीतिक संस्था निरूपित किया, जिसकी पीठ पर 11 वामपंथी जज बने हुए हैं।

न्यायपालिका की संवैधानिक व्यवस्थाओं को तानाशाही तरीकों से चुनौती देने की स्थितियां और कार्यपालिका के कमजोर दिखाई देते हुए हरेक फैसले के लिए न्यायपालिका के सामने लगातार पेश होते रहने की अवस्था के बीच ज्यादा फर्क नहीं है। एक स्वस्थ प्रजातंत्र के लिए दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं। चूंकि इस समय देश का पूरा ध्यान सरकार व न्यायपालिका के बीच चल रहे संवाद व अदालती व्यवस्थाओं पर केंद्रित है, विपक्ष की इस भूमिका को लेकर कोई सवाल नहीं खड़े कर रहा है कि कार्यपालिका को कमजोर करने में भागीदारी का ठीकरा उसके सिर पर भी फूटना चाहिए। जो असंगठित और कमजोर विपक्ष न्यायपालिका की ताकत को ही अपनी ताकत समझकर आज सरकार के सामने इतना इतरा रहा है वह स्वयं भी कभी आगे चलकर इसी तरह के टकरावों की स्थितियों का शिकार हो सकता है। यह मान लेना काफी दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि देश का राजनीतिक विपक्ष न्यायपालिका के फैसलों और टिप्पणियों में ही अपने लिए शिलाजीत की तलाश कर रहा है।

श्रवण गर्ग
लेखक भास्कर के समूह संपादक हैं

पाकिस्‍तान ने ओबामा को दी खुली चुनौती, परमाणु बमों से बढ़ेगा तनाव!

पाकिस्‍तान ने ओबामा को दी खुली चुनौती, परमाणु बमों से बढ़ेगा तनाव!

Source: agency   |   Last Updated 16:32(01/02/11)
 
 
 
वाशिंगटन. पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए सिरदर्द बन रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा के सत्ता संभालने के बाद बड़ी संख्या में चोरी छिपे परमाणु बम बनाए, जबकि अमेरिका विश्व में परमाणु बम के उत्पादन को कम करने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान में पदस्थ एक अमेरिकी राजनयिक ने पिछले सप्ताह लाहौर में लूट के इरादे से आए दो व्यक्तियों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसे लेकर भी दोनों देशों में तनाव है। अमेरिका ने पाकिस्तानी सरकार को कहा कि राजनयिक को जल्दी ही अमेरिका भेजा जाए, लेकिन लाहौर हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक आदेश में राजनयिक के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी। इसी बीच अमेरिकी सरकार ने अपने नागरिकों को जारी अलर्ट में पाकिस्तान न जाने की सलाह दी है।      

पाकिस्तान बड़ी तेजी से परमाणु हथियार बना रहा है और यह मुद्दा अब अमेरिका के साथ तनाव का कारण बन रहा है। पाकिस्तान परमाणु हथियार बनाने के अलावा इसके निर्माण में लगने वाले जरूरी सामान का भी उत्पादन तेजी से कर रहा है। याने भविष्य में भी उसकी और बम बनाने की योजना है। पाकिस्तान यदि इसी गति से हथियार बनाता रहा तो जल्दी ही वह परमाणु क्षमता वाला विश्व का पांचवां सबसे बड़े देश बन जाएगा।

अमेरिका के जाने-माने अखबार न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार पाक की बढ़ती परमाणु क्षमता अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की विश्व में परमाणु हथियार घटाने की नीति के खिलाफ है और इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है। 

सोमवार को वाशिंगटन पोस्ट ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान के पास 100 से ज्यादा न्यूक्लियर हथियार हैं और अधिकांश भारत की सीमा पर तैनात किए गए हैं।

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार अमेरिका के गुप्तचर विभाग का आंकलन है कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियारों में इजाफा राष्ट्रपति बराक ओबामा के सत्ता में आने के बाद ही किया है। यह ओबामा को खुली चुनौती है क्योंकि ओबामा परमाणु हथियारों की संख्या में बढ़ोतरी का लगातार विरोध कर रहे हैं। अमेरिका के आंकलन के अनुसार ओबामा के सत्ता संभालने के पहले हथियारों की संख्या 75 से 80 के करीब थी लेकिन अब यह संख्या 105 के करीब मानी जाती है।

 अखबार के अनुसार पिछले तीन सप्ताहों में करीब सात देशों ने पाकिस्तान की परमाणु क्षमता के बारे में अमेरिका से चिंता व्यक्त की है। अधिकांश देशों की चिंता परमाणु हथियारों के अलावा हथियारों में इस्तेमाल होने वाले प्लूटोनियम के उत्पादन पर भी है। पाकिस्तान नए प्लूटोनियम रिएक्टर को भी जल्दी ही पूरा करने वाला है, जिसके बाद उसकी परमाणु हथियार बनाने की क्षमता और बढ़ जाएगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान परमाणु प्रोजेक्ट के लिए धन कहां से जुटा रहा है, जबकि पूरे देश की आर्थिक स्थिति काफी खराब है।

अमेरिकी राजनयिक को लेकर तनाव

दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में एक अमेरिकी राजनयिक को लेकर भी विवाद गहरा गया है, जिसने पिछले सप्ताह लाहौर में गोली चलाकर दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या कर दी।

अमेरिकी राजनयिक रेमंड्स डेविड ने पिछले सप्ताह लाहौर में गोली चलाकर दो व्यक्तियों को मार दिया था। डेविस का तर्क है कि उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई। मारे गए व्यक्ति मोटर साइकल पर सवार थे और उन्हें लूटने के उद्देश्य से आए थे। पुलिस ने हालांकि हत्या का मामला दर्ज कर लिया लेकिन घटना के बाद पाकिस्तान में प्रदर्शन हुए और डेविस को कड़ी सजा देने की मांग की गई। अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तानी सरकार को कहा कि वह डेविस को वापस अमेरिका भेजने की व्यवस्था करे।

एक वकील ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपील की कि डेविस को वापस नहीं भेजा जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने आज इस मामले की सुनवाई करने के बाद कहा कि डेविस पाकिस्तान के बाहर नहीं जा सकेंगे क्योंकि उसके खिलाफ अपराधिक प्रकरण चल रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि यह भी वही (अदालत) तय करेंगे कि डेविड को राजनयिक होने के कारण स्थानीय कानून के दायरे से बाहर रखने का लाभ दिया जाए या नहीं। अमेरिका ने भले ही पाकिस्तान में करोड़ों डालर का खर्चा किया हो, लेकिन पाक नागरिक उसे नापसंद करते हैं। 

अमेरिका ने नागरिकों को अलर्ट जारी किया
अमेरिका ने आज अपने नागरिकों को कहा है कि आतंकवादी हमलों की आशंका के मद्देनजर पाकिस्तान और भारत की यात्रा से बचें। विदेश विभाग ने कहा कि भारत और पाकिस्तान सहित कई देशों में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। अलर्ट में कहा गया है कि भारत में आतंकवादियों ने उन स्थानों को निशाना बनाया है, जहां विदेशी बड़ी संख्या में आते जाते रहते हैं। पाकिस्तान में भी आतंकवादी समूहों ने पश्चिमी देश के नागरिकों पर हमले किए हैं

दूसरा 'मिस्र' बनेगा पाकिस्‍तान: खतरनाक हैं हालात, बगावत पर उतर सकती है जनता


नई दिल्ली. मिस्र और ट्यूनिशिया की तर्ज पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी सुलग सकता है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस (आईएफआरसी) ने मिस्र और ट्यूनिशिया की तर्ज पर पाकिस्तान में भी बवाल शुरू होने की आशंका जताई है। रेड क्रॉस को आशंका है कि पाकिस्तान के बाढ़ से प्रभावित रहे इलाकों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे उन इलाकों में तोड़फोड़ और अशांति फैल सकती है। 

गौरतलब है कि ३० साल से सत्ता में काबिज हुस्नी मुबारक के खिलाफ मिस्र में पिछले एक हफ्ते से लोग जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आज करीब १० लाख लोग मुबारक के खिलाफ मार्च निकाल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को शुक्रवार तक देश छोड़ने की चेतावनी दी है। इसी बीच सेना ने भी राष्ट्रपति का साथ छोड़ दिया है। 

पाकिस्‍तान के खराब हालात को देखते हुए आईएफआरसी के अध्यक्ष टाटाडेरू कोनो ने कहा कि पिछले साल बाढ़ से प्रभावित पाकिस्तान के जिलों में राजनीतिक उठापटक की आशंका है। कोनो ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि कब तक लोग महंगाई और खाने-पीने की चीजों की कमी को बर्दाश्त कर पाएंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई, अगस्त में पाकिस्तान में बाढ़ ने बहुत ज़्यादा तबाही मचाई थी। इस बाढ़ की चपेट में करीब बीस फीसदी आबादी आई थी। लाखों लोग पलायन के लिए मजबूर हुए थे। पाकिस्तान के दक्षिण में मौजूद कई इलाकों में आज भी पानी भरा हुआ है।   

पूरे पाकिस्तान में खराब हो रहे हालातपाकिस्तान में चरमपंथ के बढ़ते प्रभाव के बीच पिछले कई दशकों से पनप रहा आतंकवाद, लोकतंत्र की जगह तानाशाही, सरकार और सेना के बीच टकराव और सेना का ज़्यादा ताकतवर होना, जैसे कारकों की वजह से पूरे पाकिस्तान में अस्थिरता और अशांति का माहौल है। इसके चलते आए दिन पाकिस्तान में बम धमाके हो रहे हैं, जिसमें पिछले कुछ सालों में हजारों लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान में युवा बेरोजगारी और गरीबी का शिकार हैं। पाकिस्तान में पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में दशकों से गरीबी और अस्थिरता का माहौल है। इसका असर पूरे पाकिस्तान पर पड़ रहा है। 

दीवालिया होने के कगार पर पाकपाकिस्तान दीवालिया होने की कगार पर खड़ा है। विदेशों से मिल रही मदद भी अब कम होती जा रही है। विदेशी मददगारों का साफतौर पर कहना है कि जब तक पाकिस्तानी सरकार रक्षा पर अपने बजट में कटौती नहीं करेगा, तब तक वे कोई आर्थिक मदद नहीं देंगे। पाकिस्तानी सरकार अगर अपने रक्षा खर्च में कटौतीर नहीं करेगी तो उसे अपनी ही मुद्रा छापनी पड़ेगी, जिससे महंगाई दर और बढ़ेगी। पाकिस्तान में महंगाई दर 20 फीसदी का आंकड़ा छू लिया है। यही हालात रहे आने वाले दो-तीन सालों में सबी चीजों के दाम दोगुने हो जाएंगे।

हर सेकेंड 60 हजार का कर्ज लेता है पाक
पाकिस्तान सरकार हर सेकेंड करीब 60,000 रुपये का कर्ज ले रही है। पाकिस्तान सरकार द्वारा करों के तौर पर वसूले जा रहे हर १०० रुपये में ४० कर्जे के ब्याज के तौर पर चुकाए जा रहे हैं, वहीं ४० रुपये रक्षा पर खर्च हो रहे हैं। वहीं, दस रुपये प्रशासन पर खर्च हो रहे हैं। बाकी बचे दस रुपये ट्रेनिंग, स्वास्थ्य, पोषण, पानी की सप्लाई, जनसंख्या नियोजन, ग्रामीण विकास, विज्ञान, सड़कें, पुल के निर्माण, महिला विकास पर खर्च हो रहे हैं। 

बढ़ रही है बेरोजगारी
पाकिस्तान में लाखों लोगों के हाथ में काम नहीं है। पिछले दस सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि पाकिस्तान में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ रही है। २०१० में बेरोजगारी की दर १४ फीसदी तक पहुंच गई है। जबकि २००९ में यह ७.४ फीसदी थी। एक साल में ही यह दर दो गुना हो गई है।  
२०१० में मारे गए ५ हजार लोगएक आकलन के मुताबिक २०१० के पहले दस महीनों में ही आतंकवादी गतिविधियों, धमाकों में पाकिस्तान के करीब ४७०० लोग मारे गए हैं। साल के अंत तक यह आंकड़ा पांच हजार के आंकड़े को छू रहा है।

Sunday, January 30, 2011

मोदी को नहीं, गुजरात को जानता हूं, दारुल उलूम देवबंद के कुलपति गुलाम मोहम्मद वस्तानवी

वह देश के145 साल पुराने शीर्षस्थ इस्लामिक शिक्षण केंद्र दारुल उलूम देवबंद के कुलपति हैं। उनकी कई खासियत हैं, जो उन्हें इस प्रतिष्ठित केंद्र के कुलपति रह चुके बाकी लोगों से अलग कतार में खड़ा करती हैं। वह इस धार्मिक शिक्षण संस्था के पहले ऐसे कुलपति हैं जो एमबीए डिग्री होल्डर हैं। वह पहले कुलपति हैं जो उप्र के बाहर (गुजरात) के हैं। वह अतीत के बजाय भविष्य पर नजर रखने के पक्षधर हैं। वह शरियत के सख्त पाबंद हैं, लेकिन बेवजह की फतवाबाजी के खिलाफ हैं। जी, हां बात हो रही है मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी की, जो इसी महीने दारुल उलूम देवबंद के कुलपति नियुक्त हुए हैं। कुलपति बनने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बयान से विवाद के घेरे में हैं। उन पर इल्जाम यह है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी। नरेंद्र मोदी पर उनके बयान से लेकर दारुल उलूम में उनके खिलाफ होने वाले विरोध तक के घटनाक्रम पर उप्र राज्य ब्यूरो प्रमुख नदीम ने मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी से बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश- नई जिम्मेदारी मिलते ही इस तरह की मुश्किल में घिरना, कैसा महसूस कर रहे हैं आप? सब कुछ गलतफहमी की वजह से हुआ है। मीडिया ने मेरी बातों को गलत तरीके से पेश किया जिसकी वजह से यह माहौल बना। मैंने हकीकत में जो बात कही थी वह सबके सामने रख दी। अगर कुछ लोग समझने को तैयार नहीं हैं तो मैं क्या कर सकता हूं? विवाद की वजह है कि आपने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी। क्या यह सही है? मैंने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट नहीं दी। और भला मैं नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाला कौन हो सकता हूं? गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की जो भूमिका रही है उसे भुलाया नहीं जा सकता। क्लीन चिट न सही लेकिन उनके शासन की तारीफ तो की आपने? मैंने किसी की तारीफ नहीं की। मैं किसी नरेंद्र मोदी को नहीं जानता। मैं गुजरात को जानता हूं। अगर आप मुझसे आठ साल पहले के गुजरात के बारे में पूछेंगे तो मैं तब के हालात बताऊंगा और जब आप आज के हालात पूछेंगे तो मैं आज के हालात बताऊंगा। आज की तारीख में मैं यह तो नहीं कह सकता है कि गुजरात में दंगा हो रहा है। कफ्र्यू लगा है। लोग मारे जा रहे हैं। आपका कहना है कि मीडिया ने आपके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। क्या आप बता सकते हैं कि आपने कहा क्या था? गुजरात के बारे में वही बात जो अभी मैंने आपसे कही। आज का गुजरात कैसा है? सभी लोग खा-पी रहे हैं। मस्त हैं। इसी वजह से तो मोदी के शासन की तारीफ हो रही है और आप उसकी तस्दीक कर रहे हैं.. (सवाल को बीच में काटते हुए) मैं दारुल उलूम का कुलपति हूं। आप मुझसे यहां के बारे में सवाल करिये। गुजरात के बारे में अगर आपको बात करनी है तो वहां के किसी आदमी से बात करिए। क्या आप नरेंद्र मोदी को माफ करने को तैयार हैं? नहीं, किसी भी सूरत में नहीं। मैं क्या नरेंद्र मोदी को तो अल्लाह भी माफ नहीं करेगा। दारुल उलूम देवबंद में आपको लेकर इतना विरोध क्यों? जितने विरोध की बात मीडिया में आ रही है, उतना विरोध वास्तव में हो नहीं रहा है। असंतोष पर काबू पाने के लिए छात्रों को निलंबित करना पड़ा और आप कह रहे हैं उतना विरोध नहीं है जितना मीडिया में आ रहा है? परिसर में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। दारुल उलूम की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। छात्रों के असंतोष के पीछे क्या आपको अपने खिलाफ कोई साजिश भी दिखाई देती है? मेरे पास इसका कोई सबूत नहीं है। जब तक मेरे पास कोई पुख्ता सबूत न हो, मैं इसे साजिश नहीं सकता। बच्चे हैं, हो सकता है कि खुद बहक गए हों। यह भी हो सकता है कि किसी के बहकावे में आ गए हों, लेकिन उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने भविष्य में ऐसी गलती न करने की बात कही तो मैंने उनका निलंबन वापस कर दिया। आपने इस्तीफा देने की घोषणा की थी, क्या यह फैसला किसी दबाव में था? नहीं कोई दबाव नहीं था। मैं नहीं चाहता था कि बेवजह मेरी वजह से समस्या पैदा हो। आज की तारीख में आप मुसलमानों की सबसे बड़ी क्या समस्या देखते हैं? गरीबी और अशिक्षा आज की तारीख में मुसलमानों की सबसे बड़ी समस्या हैं। मुसलमानों को अपने आपको तालीम और तिजारत सेजोड़ना होगा। इसके बिना मुसलमानों की तरक्की मुमकिन नहीं है। मुसलमानों को यह बहुत अच्छी तरह समझनी होगी कि उनकी गरीबी मिटाने के लिए कोई दूसरा नहीं आएगा। अपनी गरीबी मुसलमानों को खुद मिटानी होगी। आप कह रहे हैं कि तरक्की के लिए मुसलमानों को अपने को तालीम और तरक्की से जोड़ना होगा, इसके लिए आपको क्या रास्ता दिखता है? किसी चीज की भी भूख खुद रास्ता दिखा देती है। जिस दिन मुसलमान में यह भूख पैदा हो गई कि उसे हर कीमत पर तालीम चाहिए, वह तालीम याफ्ता हो जाएगा। तालीम के बाद उसने अगर तिजारत की ठानी तो वह तिजारती हो जाएगा। बात जब मुसलमानों की तरक्की की होती है, आगे बढ़ने की होती है तो लड़कियों की सह शिक्षा, पुरुषों के साथ काम करने जैसे मुद्दों पर फतवे आ जाते हैं, इससे क्या तरक्की का मार्ग बाधित नहीं होता है? किसी विषय पर कुरान क्या कहता है, यह फतवा है। फतवा मांगना गलत नहीं बस उसकी गलत व्याख्या नहीं होनी चाहिए। कहा जाता है कि मुसलमानों की तरक्की में बाधा उनका रूढि़वादी होना भी है? यह बात कतई गलत है। मुसलमान न तो रूढि़वादी होते हैं और न ही आधुनिक। उनका ईमान कुरान होता है। कुरान में जो हिदायत दी गई है, मुसलमान उस हिसाब से जिंदगी जीता है। कुरान को मानना हर मुसलमान के लिए जरूरी शर्त है। दारुल उलूम देवबंद में आपको जो नई जिम्मेदारी दी गई है उसके बाद आपने क्या कोई लक्ष्य निर्धारित किया है? इस इदारे का अपना एक मुकाम और पहचान है। यह और तरक्की हासिल करे और इसे और शोहरत हासिल हो।

और खतरनाक हुआ पाकिस्तान, ऐटमी हथियारों की संख्या दोगुनी

वॉशिंगटन. आतंकवाद को बढ़ावा देकर पहले ही भारत और बाकी दुनिया के लिए खतरा बन चुका पाकिस्तान अब ज्‍यादा खतरनाक बन गया है। उसने भारत को काफी पीछे छोड़ते हुए अपने परमाणु हथियारों की संख्या दोगुनी कर ली है। अमेरिका के मशहूर अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने पिछले कुछ सालों में परमाणु हथियारों का जखीरा दोगुना कर लिया है अब इनकी संख्या 100 पार कर चुकी है। अखबार के मुताबिक पाकिस्तान ने यूरेनियम और प्लूटोनियम उत्पादन में खासी तेजी लाते हुए नए परमाणु हथियार विकसित किए हैं। 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने गैर सरकारी जानकारों के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की है।    

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के विकास से चिंतित है। पाकिस्तान को दुनिया के सबसे खतरनाक और अशांत इलाकों में से एक माना जाता है। यहां परमाणु हथियारों पर आतंकी कब्‍जे की भी आशंका जताई जाती रही है। ऐसे में पाकिस्‍तान में ज्‍यादा से ज्‍यादा परमाणु हथियार बनाने की होड़ से ओबामा प्रशासन के सामने ऊहापोह की स्थिति है। 

बताया जाता है कि भारत के पास करीब 50 से 70 परमाणु हथियार हैं।  भारत की नीति परमाणु ताकत बढ़ाने के बजाय परमाणु ऊर्जा का इस्‍तेमाल जनता के हितों के लिए करने की है। पर ओबामा प्रशासन को डर है कि पाकिस्‍तान की उल्‍टी नीति के चलते दक्षिण एशिया के बाकी देश भी परमाणु हथियार विकसित करने की होड़ में शामिल हो सकते हैं। 

ओबामा की असमंजस यह भी है कि वह भारत के साथ बेहतर आर्थिक, राजनैतिक और रक्षा संबंध बनाने की कोशिश के साथ ही अफगानिस्तान में आतंक के खिलाफ लड़ाई में मुख्य सहयोगी पाकिस्तान के साथ भी अपने रिश्ते गहरा करना चाहते हैं। लेकिन भारत और पाकिस्तान के खराब रिश्ते के चलते अमेरिका के सामने दुविधा की स्थिति है। 

सियासी तौर पर अस्थिर पाकिस्तान दो आशंकाओं के बीच फंसा हुआ है। पाकिस्तान को आशंका है कि आतंकवादी परमाणु हथियारों और बम बनाने वाले सामानों पर कहीं कब्जा न कर लें वहीं पाकिस्तान को इस बात का भी शक है कि अमेरिका उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम पर बंदिशें लगाकर भारत को फायदा पहुंचा सकता है। 

पिछले हफ्ते जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निशस्त्रीकरण के मुद्दे पर सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के राजदूत जामिर अकरम ने  अमेरिका समेत दूसरी बड़ी ताकतों पर दोहरे मापदंड और भेदभआव का आरोप लगाया। अकरम ने कहा कि ताकतवर देश पाकिस्तान पर  उस समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं कि जिसके तहत भविष्य में होने वाले यूरेनियम और प्लूटोनियम के उत्पादन पर रोक लगाने की बात कही गई है।    

पाकिस्तान के पास बम, भारत के पास सामानअमेरिकी मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान ने भारत से ज़्यादा परमाणु बम विकसित कर लिए हैं। लेकिन भारत के पास भविष्य में बम बनाने के काम आने वाला यूरेनियम और प्लूटोनियम पदार्थ है। जबकि पाकिस्तान को इसका उत्पादन और विकास करना होगा। यही वजह है कि पाकिस्तान यह आरोप लगाता है कि भारत इस मामले में मजबूत स्थिति में है और भारत-अमेरिका के बीच परमाणु समझौते से भी भारत को काफी मदद मिली है।
 

पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहता है अमेरिका अमेरिका रिका की कोशिश है कि इस साल के आखिर तक परमाणु हथियार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए ताकि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान जैसे देशों के सामने परमाणु अप्रसार का मुद्दा मजबूती से रखा जा सके। इस क्षेत्र में चीन भारत को बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है। चीन ने पाकिस्तान में दो न्यूक्लियर एनर्जी रिएक्टर बनाने में सहयोग कर रहा है। रूस भारत के साथ ऐटमी सहयोग कर रहा है और उसने पाकिस्तान को पिछले हफ्ते बताया कि रूस पाकिस्तान की गतिविधियों से चिंतित है।  
अमेरिका के हथियारों के प्रमुख वार्ताकार रोज गॉटमोलर ने हाल ही में इस मुद्दे पर कहा, 'हमारा धैर्य खत्म हो रहा है।

संघर्षो के बीच दोराहे पर देवबंद


समकालीन संसार की सबसे बड़ी नादानियों में से एक है तमाम धर्म, मत संप्रदाय के आचार्यो को काटरून किरदारों में बदल देना। और इसीलिए इमामों का चित्रण लंबी-सी दाढ़ी और विकृत आंखों के साथ किया जाता है, पंडित की जरूरत से लंबी चोटी, बड़ी तोंद और लोलुप निगाहें दिखाई जाती हैं, तो ईसाई फादर बुरी नजर को छुपाने में नाकाम बगुलाभगत की तरह का आभामंडल रखते हैं। इस बेतुकेपन के लिए नैतिक ह्रास वाले आधुनिक संसार में धर्म की अवनति जिम्मेदार है और इसका एक आंशिक कारण हर धर्म-संप्रदाय के पुरोहित वर्ग में जड़तावादी चरमपंथ की मौजूदगी है, जो परमसत्ता के नाम पर हिंसा को न्यायसंगत ठहराता है। 

आस्था- मंदिर, मस्जिद या चर्च- स्वेच्छाचारिता और तानाशाही के असंख्य रूपों से निरंतर संघर्षरत लोगों के लिए परंपरागत अभयारण्य रही है। सक्षम सरकारें, चाहे वे तानाशाह हों या लोकतांत्रिक, धर्माचार्यो की ताकत को समझ चुकी हैं और दोहरी प्रतिक्रिया का चुनाव करती हैं : वे जड़तावादी चरमपंथ को दबाती हैं और चापलूसी व रिश्वत के चतुर मेल के जरिए धर्माचार्य वर्ग को स्थापित होने में सहयोग देने की निरंतर कोशिश करती रहती हैं। इस वर्ग के लिए परीक्षा की असली घड़ी तुलनात्मक रूप से शांत दौर में नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दमन के दौरों में आती है। 

यदि हम भारतीय और खासतौर से उत्तर भारतीय मुस्लिमों के जीवन में उलेमा के असर को समझना चाहते हैं, तो हमें 19वीं सदी में उतार के युग में उनके द्वारा निभाई गई शानदार भूमिका को याद करना पड़ेगा, जब सहारा देने वाला हर स्तंभ भरभरा रहा था। इन्हें या तो पतनकाल की दीमक चाट रही थी या ये ब्रिटिश सेना की उभरती हुई ताकत से परास्त हो रहे थे। तब वह उलेमा वर्ग ही था, जिसने समुदाय को बांधे रखा। यहां तक कि इसकी जड़तावादी शाखा शाह वलीउल्लाह के मदरसे के छात्रों (या तालिबान) ने राजनीतिक शक्ति की पुनस्र्थापना के लिए जेहाद की शुरुआत भी की। यह युद्ध विफल रहा, पर जो इस युद्ध में शामिल नहीं हुए थे, उन्होंने निचले स्तर पर नेतृत्व के जरिए उस समुदाय को कहीं ज्यादा बड़ी सेवा उपलब्ध कराई, जो आर्थिक और सामाजिक दबाव में था और न सिर्फ भरण-पोषण को लेकर डरा हुआ था, बल्कि अपनी भाषा और संस्कृति के खात्मे को लेकर भी भयभीत था। ऐसे पीड़ादायक हालात के बीच से ही करीब डेढ़ सदी पहले देवबंद से दार-उल-उलूम जैसे संस्थान का जन्म हुआ। महात्मा गांधी ने इस मदरसे के न सिर्फ धार्मिक महत्व, बल्कि जनसामान्य से इसके जुड़ाव के असर को भी पहचाना था। 

देवबंद बीसवीं सदी की शुरुआत में उच्चवर्ग, नवाब और जमींदारों के प्रभुत्व वाली मुस्लिम राजनीति का विरोधी था। पश्चिम प्रभावित संवाद में देवबंद का आमतौर पर दानवीकरण ही किया गया। हां, एक गौण गतिविधि भी है, जिसने देवबंद को प्रतिगामी घोषणाओं की एक फतवा फैक्टरी में बदल दिया है। और इसके कुछ प्रभावशाली नाम हिंसा को जायज ठहराते रहे हैं। लेकिन हर महान संस्थान से कुछेक ऐसे बच्चे तो निकलते ही हैं, जो अपने बुद्धिमान बुजुर्गो का सम्मान नहीं करते। देवबंद उन मुस्लिमों के लिए बेहद शानदार स्रोत है, जिन्हें जन्म और वंश परंपरा से कोई लाभ नहीं मिला। 

मुस्लिमों के बीच यह लगाव देवबंद को शक्ति केंद्र बनाता है। और जहां पर शक्ति होगी, वहां राजनीति भी होगी। फिलहाल हम विरोधी गुटों के बीच राजनीतिक संग्राम देख रहे हैं और अधिकारप्राप्त दल देवबंद पर नियंत्रण के लिए उन्हें हवा दे रहे हैं। मोहतमिम या एक तरह से वाइस चांसलर के तौर पर मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तान्वी की नियुक्ति से जन्मी अशांति के पीछे कई कारण हैं। वस्तान्वी एक असाधारण मौलाना हैं, जिन्होंने 1979 में गुजरात-महाराष्ट्र की सीमा पर एक जनजातीय क्षेत्र में महज छह छात्रों के साथ एक झोपड़ी में मदरसा शुरू किया था और उसे देशभर में दो लाख छात्रों वाले संस्थान में बदल दिया। इसीलिए वे उत्तरप्रदेश के बाहर के पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें यह सम्मान और जिम्मेदारी दी गई। उनकी मौजूदगी उन सुधारों के लिए भरोसा दिलाती है, जो छात्रों की गहरी इच्छा हैं। लेकिन यह उस वर्ग के लिए चिंता भी है, जिसने दिल्ली और देश के बाहर से व्यक्तिगत लाभों के लिए देवबंद को निचोड़ा है। गहरे तक पैठ चुके इन स्वार्थो को तो हर बहाने से वस्तान्वी को चुनौती देनी ही थी। और उन्होंने आत्मरतिकों की मदद से ताकत के भूखे पत्रकारों को खोज ही लिया। 

जैसा कि पहले भी हो चुका है, देवबंद दोराहे पर है। अगर यह धार्मिक कर्मकांडी समूह की मिल्कियत बन जाता है, जो अपने लालच के लिए इस महान नाम का शोषण करना चाहते हैं, तो फिर वस्तान्वी बाहर हो जाएंगे। अगर देवबंद अपने संस्थापकों के आदर्शो के प्रति ईमानदार बना रहता है, तो फिर यह शैक्षिक सुधार और खुले विचारों की ओर जाएगा, जो एक साधनहीन भारतीय मुस्लिम बच्चे को साधनसंपन्न वयस्क में बदल सकता है।

एम.जे. अकबर
लेखक द संडे गार्जियन के संपादक और इंडिया टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर हैं

Saturday, January 29, 2011

'प्रस्ताव' ठुकराया तो छात्रा को चाकू भोंका प्रफेसर ने

चेन्नै ।। 22 साल की स्टूडेंट द्वारा ठुकराए जाने से नाराज एक प्रफेसर ने उस पर चाकू से कातिलाना हमला कर दिया। मामला तिरुपाचूर के एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज का है। 

पुलिस के मुताबिक इंजीनियरिंग कॉलेज की फाइनल इयर स्टूडेंट एस प्रीति रामावरम की एक कंपनी से वापस लौट रही थीं जहां वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक प्रॉजेक्ट कर रही थीं। रास्ते में ही प्रफेसर अरुण कुमार ने उन पर चाकुओं से हमला कर दिया। प्रीति की गरदन, सर और बाईं उंगली में चोटें आईं। दोस्तों ने शोर मचाया, लेकिन अरुण कुमार वहां से भागने में सफल रहा। प्रीति को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उनका इलाज चल रहा है। वालासरवक्कम पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। 

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक माधवरम के अरुण कुमार तिरुपाचूर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रफेसर और इलेक्ट्रॉनिक्स के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट हैं जहां प्रीति स्टूडेंट है। अरुण कुमार शादीशुदा हैं लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी में कुछ समस्याएं चल रही हैं। 

अरुण कुमार ने कुछ दिनों पहले प्रीति को प्रोपोज किया था, लेकिन प्रीति ने वह प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसके बावजूद जब अरुण कुमार ने उसकी पीछा नहीं चोड़ा और उसे लगातार परेशान करते रहे तब प्रीति ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। प्रीति की शिकायत पर पुलिस ने अरुण कुमार को प्रीति से दूर रहने की हिदायत दी थी। माना जा रहा है कि इसी से नाराज अरुण कुमार ने प्रीति पर हमला कर दिया।

मॉर्निंग में सेक्स

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(pic: Gettyimages)
आज तक यह माना जाता रहा है कि सुबह अच्छा नाश्ता आपको दिनभर तरो-ताजा रखता है। पर, अमेरिका के एक रिसर्च साइंटिस्ट और सेक्स सलाहकार डॉ. डेबी हरबेनिक ने सुबह-सुबह सेक्स को सेहत के लिए सबसे फायदेमंद बताया है। डॉ. डेबी के मुताबिक, लोग यह समझते हैं कि एक कप अच्छी चाय के साथ सुबह की शुरुआत बढ़िया रहती है। पर, अगर कोई सुबह सेक्स से दिन की शुरुआत करे तो उसकी सेहत कहीं अधिक अच्छी रहेगी। 

इसकी वजह उन्होंने यह बताई कि सुबह के वक्त ऐसा करने से जो केमिकल शरीर से निकलते हैं, वे आपको कहीं अधिक संतुष्टि देते हैं और ये आपको प्रसन्न रखने के साथ-साथ सेहतमंद भी रखते हैं। एक और अमेरिकी सेक्स सलाहकार जेन ग्रीनर ने कहा कि सुबह सभी को और कामों की जल्दी भी होती है। ऐसे में सेक्स क्रिया भी थोड़ी जल्दी में होती है, जिससे शारीरिक ऐक्टिविटी कहीं अधिक तेज होकर एक तरह से किसी एक्सरसाइज की तरह मदद करती हैं। 

डॉ. डेबी ने अपनी रिसर्च के पक्ष में बेलफास्ट यूनिवर्सिटी के शोध का भी हवाला दिया है। उस शोध में यह पाया गया है कि हफ्ते में तीन दिन सेक्स से किसी भी तरह के स्ट्रोक पड़ने का खतरा आधा रह जाता है। वर्ष 2009 में की गई एक और स्टडी के हवाले से उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पुरुष और महिलाओं दोनों की ही प्रजनन क्षमता बढ़ भी जाती है

6 करोड़ बार देखे जाने के बाद भी अविश्वस्नीय है यह वीडियो


दिल्ली : यूट्यूब पर मोस्ट पॉपुलर वीडियो सर्च करने पर बैटल एट क्रुगर नाम से एक वीडियो डिस्पले होता है। मई 2007 में पोस्ट हुए इस वीडियो को अब तक लगभग 6 करोड़ बार देखा जा चुका है लेकिन फिर भी यह वीडियो अविश्वसनीय सा लगता है।  जंगल के कानून को दर्शाता यह वीडियो सितंबर 2004 में शूट किया गया था। आठ मिनट के इस वीडियो में दक्षिण अफ्रीका के क्रुगर नेशनल पार्क में कैप बफैलो (अफ्रीकी भैंसों), शेरों के एक झुंड और एक या दो मगरमच्छों के बीच की झड़प दिखती है। यह वीडियो गाइड फ्रैंक वॉट्स द्वारा गाइड की गई एक सफारी के दौरान शूट किया गया था। इसे वीडियोग्राफर डेविड बुडजिंस्की और फोटोग्राफर जेसन स्कोलबर्ग ने शूट किया था।   डिजीटल कैम रिकार्डर द्वारा शूट किए गए इस वीडियो में एक भैंसों के झुंड पानी की ओर बढ़ता हुआ दिखाई देता है जिस पर हमला करने के लिए शेर घात लगाए बैठे हैं। शेरों को देखकर भैंसों भाग जाते हैं लेकिन एक बच्चा शेरों के शिकंजे में फंस जाता है। इस बच्चे का शिकार करने की मशक्कत में शेर इसे लेकर पानी में गिर जाते हैं जहां एक या दो मगरमच्छ शेरों से इस बच्चे को छीनने की कोशिश करते हैं।  सभी शेर मिलकर बच्चे को मगरमच्छों के मुंह से निकाल लेते हैं। इससे पहले की वो इस बच्चे को अपना भोजन बनाते भैंसों का झुंड दोबारा इकट्ठा होकर शेरों पर हमला करता है। कई मिनट तक शेरों के जबड़ों में रहने के बाद भी भैंस का बच्चा जिंदा बच जाता है और भैंसों का समूह अंत में शेरों को खदेड़ कर इस बच्चे की जान बचा लेता है। इस वीडियो को देखकर इस पर आसानी से यकीन नहीं होता। लेकिन यह वीडियो है एकदम असली। भैंस का बच्चा पहले शेरों के चंगुल से छूटकर पानी में गिरता है जहां मगरमच्छ उस पर हमला बोल देते हैं। शेर उसे मगरमच्छ के मुंह से निकालते हैं लेकिन भैंसें वापस आकर उसे छुड़ा ले जाते हैं। यूट्यूब पर आते ही यह वीडियो बेहद लोकप्रिय हो गया था। बाद में इस वीडियो पर टाइम मैग्जीन ने एक लेख भी प्रकाशित किया था। यही नहीं नेशनल ज्योग्राफिक चैनल ने भी इस वीडियो पर डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी

राहुल जी आप ही की तो देन है भ्रष्‍टाचारी राजनीतिक तंत्र?

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औरंगाबाद। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने महाराष्‍ट्र के औरंगाबाद जिले में युवाओं से कहा, कि वे भ्रष्‍टाचारी राजनीतिक तंत्र को खत्‍म करने के लिए आगे आएं। लेकिन इस बार फिर वे अपनी पार्टी के गिरेबान में झांकना भूल गए। अरे राहुल जी जिस भ्रष्‍टाचारी तंत्र को आप जड़ से उखाड़ फेंकने की बात कर रहे हैं, वो आपकी ही कांग्रेस पार्टी की देन है। तो क्‍या देश के युवा बाहर से आकर आपकी पार्टी के भ्रष्‍टाचारी नेताओं को बाहर करेंगे? क्‍या आपको पता है, भ्रष्‍टाचार के सबसे ज्‍यादा मामले आपकी ही सरकार में उजागर हुए हैं? 

यह सवाल हर उस युवा के मन में चल रहा है, जो अपने देश को भ्रष्‍टाचार से मुक्‍त देखना चाहता है। राहुल गांधी के शनिवार के भाषण ने इसके अलावा कई और सवाल युवाओं के बीच खड़े कर दिए हैं। आइये एक-एक कर सवालों पर गौर करते हैं। 

क्लिक करें- छात्रों की क्‍लास में फेल हुए राहुल गांधी 

पहला सवाल भ्रष्‍टाचार का है, जिसमें राहुल गांधी अपने हर भाषण में युवाओं से भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने के लिए राजनीति में आने का आह्वान करते हैं। 12 जनवरी को राहुल ने यही बात लखनऊ में भी कही थी, तब एक छात्र ने उनसे पूछा कि क्‍या राजनीति में करियर सुरक्षित है? तो राहुल का जवाब था, अगर आपको करियर बनाना है, तो आप जाकर बीबीए, एमबीए करें। अपने इस बयान से राहुल गांधी ने बीबीए, एमबीए करने वाले छात्रों के लिए राजनीति के दरवाजे सीधे बंद कर दिए और सभागार में मौजूद युवाओं के सवाल अनसुलझे रहे। ऐसा ही कुछ शनिवार को औरंगाबाद में हुआ। यहां भी राहुल यह नहीं बता सके, कि राजनीति में कैसे आएं। 

महाराष्‍ट्र दौरे पर आए राहुल गांधी ने कहा कि लोग शिकायत करते हैं, लेकिन भ्रष्‍टाचार खत्म करने के लिए राजनीतिक तंत्र को बदलने की कोशिश नहीं करते। राजनीतिक तंत्र में खराबी है और इसे बदलने के लिए युवाओं की सहभागिता की जरूरत है। राहुल जी जरा बताएं कि अगर भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अगर देश के युवा लोकतांत्रिक ढंग से प्रदर्शन करें, तो क्‍या गारंटी है, कि आपकी सरकार उन पर लाठी नहीं बरसाएगी। 

राहुल गांधी का कहना है कि अब बदलाव की जरूरत है और इस बदलाव के लिए युवा और कुशल लोग हमारे साथ जुड़ें, क्योंकि बदलाव के लिए हमें उनकी जरूरत है। यहां सवाल यह उठता है कि अगर कोई युवा सिर पर कफन बांध कर कांग्रेस से जुड़ भी गया, तो क्‍या उसे पार्टी से भ्रष्‍टाचारी तत्‍वों को बाहर करने की पूरी छूट दी जाएगी? शायद नहीं! 

जी हां हर राज्‍य में राहुल गांधी का एक ही भाषण अब युवाओं पर कोई असर डालने वाला नहीं है। अगर कांग्रेस को वाकई में देश के युवाओं को अपने साथ जोड़ना है, तो उससे पहले पार्टी में सफाई करनी ही होगी, नहीं तो आने वाले युवा भी गंदगी में ढल जाएंगे

दोर्जे के जरिए अपने नापाक मंसूबे हासिल करना चाहता है चीन, गुरु पर भी था शक


नई दिल्ली. चीन ने अपने हितों को साधने और प्रतिद्वंद्वी देशों की खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए ऐसे देशों में बड़े पैमाने पर अपने एजेंट रखे हुए हैं। इनमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं। चीन भारत में अपने जासूसी का जाल बिछाने की कोशिश कर रहा है। करमापा के निवास से विदेशी खासकर चीनी मुद्रा की बरामदगी से भारत की खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। भारतीय जांच एजेंसियों को करमापा के चीन का जासूस होने का शक है। साफ है चीन भारत में भी अपनी पकड़ बनाना चाहता है।  

सूत्रों का कहना है कि चीन चाहता है कि दोर्जे हिमालय के भारत में मौजूद हिस्से में वही करें जो चीन ने नेपाल में किया है। भारत-नेपाल सीमा पर चीन ने करीब 17 चीन स्टडी सेंटर खोल दिए हैं। यहां चीनी भाषा और वहां की संस्कृति पढ़ाई जाती है। लेकिन जानकारों का मानना है कि चीन की बड़ी योजना नेपाल में चीन के असर को बढ़ाना है, जिससे भारत के हित प्रभावित होंगे। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि चीन ने दोर्जे को भारत इसलिए भेजा ताकि दलाई लामा की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके और दोर्जे खुद को दलाई लामा के उत्तराधिकारी के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकें। इसके साथ ही सूत्रों का दावा है कि चीन चाहता है कि दोर्जे सिक्किम के रूमटेक बौद्ध मठ पर भी नियंत्रण कर लें। रूमटेक मठ बौद्ध धर्म के काग्यु मत का प्रमुख केंद्र है। लेकिन दोर्जे के प्रतिद्वंद्वी करमापा के विरोधियों की सक्रियता की वजह से अब तक ऐसा नहीं हो सकता है। हाल ही में भारत-नेपाल सीमा पर तीन चीनी नागरिकों को फर्जी पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के भी जासूस होने का शक है। हालांकि, चीन ने इन्हें सिविल इंजीनियर बताया है।     

गुरु पर भी था शक
करमापा के गुरु ताई सीतु रिंपोछे को बौद्ध मठ निर्माण में चीनी धन के निवेश व चीन के साथ संबंधों के चलते उन्हें भारत छोडऩे का सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके विरोध में रिंपोछे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उन्हें भारत में रहने की अनुमति दी थी। रिंपोछे के मठ में अधिकतर चीन प्रभावित देशों के बौद्ध अनुयायी निरंतर आते-जाते हैं। ताई सेतु रिंपोछे के चीनी अधिकारियों से संपर्क में होने के आरोपों के चलते उनका भारत में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था।

अमेरिका में भी जासूस 
चीन अपने प्रतिद्वंद्वी देशों में न सिर्फ अपने एजेंट से जानकारियां हासिल करता है बल्कि वह प्रतिद्वंद्वी देशों की खुफिया एजेंसी में भी अपने जासूस घुसाने की कोशिश करता है। हाल ही में अमेरिका की मिशिगन अदालत ने एक अमेरिकी नागरिक को चार साल की सज़ा सुनाई। इस आदमी पर आरोप था कि वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए में भर्ती होने की कोशिश कर रहा था ताकि वह चीन के लिए जासूसी कर सके। 29 साल के ग्लेन श्राइवर ने यह माना कि उसने अक्टूबर में राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी जानकारियां चीन के खुफिया अधिकारियों को देने की साजिश रची थी। श्राइवर ने यह भी माना कि उसने चीनी अधिकारियों से 70 हजार अमेरिकी डॉलर की रकम भी हासिल की थी। हाल ही में एक अन्य मामले के तहत एक भारतीय मूल के शख्स को अमेरिकी अदालत ने चीन को लड़ाकू विमान की तकनीक बेचने के मामले में दोषी मानते हुए ३२ साल की सज़ा सुनाई है

जासूसी के शक में करमापा पर चल सकता है केस, दोबारा हो रही पूछताछ


नई दिल्ली/धर्मशाला. हवाला कारोबार और चीन का जासूस होने के आरोपों का सामना कर रहे बौद्ध धर्म के तिब्बती गुरु करमापा उग्येन दोर्जे से शनिवार की दोपहर में पुलिस और खुफिया एजेंसी के अधिकारी दोबारा पूछताछ कर रहे हैं। इससे पहले शुक्रवार रात में भी दोर्जे से पूछताछ की गई। इस बारे में ब्योरा आज सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि दोर्जे शनिवार सुबह की प्रार्थना में शामिल नहीं हुए। माना जा रहा है कि दोर्जे से पूछताछ के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। दोर्जे के पास कोई कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कोई राजनयिक विशेषाधिकार (इम्युनिटी) नहीं है और भारतीय कानूनों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।   

हिमाचल प्रदेश में करमापा के मठ और दिल्ली के मजनू का टीला से 23 देशों की मुद्राओं में करीब 7 करोड़ रुपये की रकम बरामद की गई है। इस बरामदगी के बाद शक जताया जा रहा है कि करमापा के तार चीन से जुड़े हो सकते हैं। उधर, करमापा के कार्यालय की ओर से साफ किया गया है कि करमापा कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'भारत तिब्बत की सरकार को मान्यता नहीं देता है तिब्बत की किसी निष्कासित सरकार को भारत मान्यता नहीं देता है। भारत धर्मशाला में तिब्बतियों की सरकार को दलाई लामा का एक ब्यूरो भर मानता है। भारत के लिए तिब्बती शरणार्थी हैं, उनके पास कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कोई अधिकार नहीं हैं। अधिकारी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा।'  हालांकि कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक 1985 से पहले जन्मे तिब्बती शरणार्थी भारतीय नागरिकता ले सकते हैं।

भारत ने लगा रखी हैं बंदिशें, करमापा भी नहीं मानती 
 भारत सरकार को जब यह अंदेशा हुआ कि दोर्जे का तिब्बत से भागना और भारत आकर रहना चीन की बड़ी योजना का हिस्सा था, उसके बाद भारत ने दोर्जे की गतिविधियों पर लगाम लगा दी थी। सूत्रों ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा कि वह करमापा भी नहीं हैं और वह सिर्फ उग्येन दोर्जे हैं। भारत सरकार ने साफ किया है कि करमापा दलाई लामा के संभावित उत्तराधिकारियों में से एक हैं, लेकिन अभी उन्हें चुना जाना बाकी है। वहीं, एक अन्य अधिकारी का कहना है कि भारत तिब्बती धर्मगुरुओं को धार्मिक नेता ही मानता है, इसलिए उनके साथ वही बर्ताव किया जाएगा तो भारतीय धर्मगुरुओं के साथ किया जाता है। 

दोर्जे पर ज़मीन खरीदने का आरोप

दोर्जे पर आरोप है कि उन्होंने धर्मशाला के पास कोटला गांव में किन्नौर की किसान माया देवी के नाम से जमीन का एक बड़ा टुकड़ा खरीदा हुआ है। पुलिस इस खरीद के बदले चुकाई गई रकम के स्रोत की जांच कर रही है और कांगड़ा के जिलाधिकारी के पास यह मामला लटका हुआ है। इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होनी है। हिमाचल पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक तिब्बती शरणार्थियों के करीब 400 बेनामी जमीन सौदों के बारे में पुलिस को जानकारी है और इनमें से 263 में मामले भी दर्ज हैं।  


चीन का जासूस होने का शक 

केंद्र सरकार ने करमापा उग्येन दोर्जे के हिमाचल प्रदेश स्थित अस्थायी आवास से करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा बरामद होने पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार को संदेह है कि दोर्जे चीन के लिए एजेंट के रूप में काम कर रहा था। केंद्र सरकार इस मामले की जांच करेगी। जांच एजेंसियों ने पता लगाया है कि करमापा चीन प्रशासन के लगातार संपर्क में थे। वे कश्मीर में लद्दाख से अरुणाचल में तवांग तक स्थित बौद्ध मठों पर नियंत्रण के लिए चीन की मदद कर रहे थे। जब उनके निवास पर छापा मारा गया तो करमापा घर में ही थे और उन्होंने कार्रवाई का कोई विरोध नहीं किया। 

सरकारी सूत्रों का कहना है कि दोर्जे के चीन से संबंध स्पष्ट हैं। 17वें करमापा को हमेशा से ही चीन का आदमी माना जाता रहा है। चीन हिमालय सीमा लद्दाख से तवांग पर स्थित सभी बौद्ध मठों पर अपने नियंत्रण का प्रयास करता रहा है और करमापा उसकी मदद करता आया है। सूत्रों के मुताबिक करमापा पहले चीन में रहता था और फिर भारत आया था। उस पर काफी पहले से ही संदेह रहा है। करमापा की गतिविधियों को लेकर भी संशय रहा है क्योंकि यह देखा गया कि वह धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर चीन का एंजेडा चला रहा था। सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने करमापा पर काफी समय से नजर रखी हुई थी। करमापा के 2000 में तिब्बत से भागने को भारतीय एजेंसियां हमेशा से ही शक की नज़र से देखती रही हैं। करमापा ने दावा किया था वे चीन सरकार को चकमा देते हुए नेपाल पहुंचे थे। 25 साल के दोर्जे ने जनवरी, 2000 में तिब्बती से भागने की वजह से सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय उनकी उम्र महज 14 साल थी।  

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि करमापा के तार चीन से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि करमापा के निवास से 11 लाख युआन (करीब 77 लाख रुपये)  मिलना सिर्फ हमारे अंदेशे को पुख्ता करता है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि करमापा दोर्जे चीन के एजेंट के तौर पर चीन की ओर दोस्ताना रुख रखने वाले तिब्बती संस्थान पूरे हिमालय क्षेत्र में खड़ा करने का काम कर रहे हैं। 

सिद्धबाड़ी में करमापा नजरबंद

करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे को उनके सिद्धबाड़ी स्थित अस्थायी निवास पर अघोषित नजरबंद कर दिया गया है। ग्यूतो तांत्रिक विवि सिद्धबाड़ी स्थित करमापा के कार्यालय व आवास के बाहर सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस करमापा सहित उनके अन्य प्रमुख सहयोगियों से किसी भी समय पूछताछ कर सकती है। उधर, शुक्रवार को दलाईलामा कर्नाटक के लिए रवाना हो गए। करमापा को भारत ने सामान्य तिब्बती की तरह शरण दे रखी है। ऐसे में सशस्त्र पहरे के कदम को अलग नजर से देखा जा रहा है।

करमापा अकाउंटेंट कार्यालय से पुलिस को भारत और 25 अन्य देशों की मुद्रा बरामद हो चुकी है, जिनकी कीमत करीब छह करोड़ है। इनमें चीनी मुद्रा के 11 लाख युआन भी शामिल हैं। इसके अलावा 6 लाख यूएस डॉलर, 30 लाख भारतीय मुद्रा सहित ताइवान, नेपाल, कनाडा, डेनमार्क, सिंगापुर, हांगकांग व जर्मनी की मुद्राएं शामिल हैं। करमापा के अस्थायी निवास से बरामद भारतीय और विदेशी मुद्रा की गिनती अभी जारी है। मैहतपुर में गाड़ी में एक करोड़ ले जाते वक्त गिरफ्तार युवकों की सूचना पर पुलिस ने ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय में बुधवार रात ढाई बजे छापा मारा था। 

अकाउंटेंट कार्यालय से बरामद भारतीय और विदेशी मुद्रा को गिनने के लिए नोट गिनने वाली मशीन लगानी पड़ी है। करीब दो दर्जन पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी इसमें जुटे हैं। शुक्रवार सुबह 4 बजे नोटों की गिनती बंद कर गिनी गई राशि पुलिस के माल खाने में जमा करवाई गई। शुक्रवार सुबह दस बजे दोबारा गिनती शुरू की गई। जांच में आईबी, रॉ, सीआईडी सहित जिला कांगड़ा और ऊना पुलिस जुटी हैं। शुक्रवार दोपहर बाद अकाउंटेंट कार्यालय में नोटों की बरामदगी का काम पूरा करने के बाद जांच एजेंसियों ने करमापा के निजी सचिव गोम्पो छेरिंग के कार्यालय का ताला तोड़कर कमरे में रखे नोटों के बैगों को कब्जे में लेकर गिनती शुरू कर दी है

Indian Educator, Humanist and Politician

"If we are to live and grow as a university, one of whose paramount tasks is to not only leaders of thought and action but also workers dedicated to the service of the nation, we cannot sit idle with philosophic concern and let things drift as they may. So far as we are concerned, it is for us to set our house in order. It is for us, and specially the younger generation, Hindus, Moslems and Christians alike, to combine and resolutely stand for the permanent well-being of our province and to rescue her from the deadly stagnation which now seems to envelop her."
Speech delivered at Calcutta University Convocation on 2nd March1935.

मिस्रवासियों के अधिकारों का सम्मान करें मुबारक: ओबामा

वॉशिंगटन।। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को मिस्र की सरकार से कहा कि वह अपने नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करे। मिस्र इन दिनों राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक की बर्खास्तगी की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन से जूझ रहा है। 

ओबामा ने मुबारक से टेलिफोन पर बात करने के थोड़े ही समय बाद वाइट हाउस में ये बातें कही। इसके ठीक पहले मुबारक ने अपने सम्बोधन में पद न छोड़ने का संकल्प लिया था, लेकिन उन्होंने इस बात की घोषणा की थी कि वह अपनी कैबिनेट भंग कर रहे हैं। 

ओबामा ने कहा, 'मौजूदा समय में इस तरह के ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है, जो मिस्त्र के लोगों की मांगे पूरी करता हो।' इसके पहले शुक्रवार को अमेरिका ने धमकी दी थी कि यदि मुबारक सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर तत्काल रोक नहीं लगाती और सुधारों को लागू करने के लिए आगे नहीं बढ़ती तो उसे दी जाने वाली सहायता रोक दी जाएगी। 

ओबामा ने कहा कि उन्होंने मुबारक से कहा कि उन्हें सुधार के अपने वादे पर अमल करने की आवश्यकता है। ओबामा ने कहा, 'वादे को अर्थवान बनाने की उनकी जिम्मेदारी है।' 

ओबामा ने जोर देकर कहा कि अमेरिका की मुख्य चिंता हिंसा रोकने को लेकर है। उन्होंने सरकार और प्रदर्शनकारियों, दोनों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया। ओबामा ने मुबारक सरकार से इंटरनेट और मोबाइल फोन सेवाएं बहाल करने के लिए कहा। 

गौरतलब है कि कि अमेरिका, मुबारक का लम्बे समय से सहयोगी रहा है, लेकिन ओबामा ने अपनी टिप्पणियों में जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन मिस्र के लोगों के सार्वभौम अधिकारों के पक्ष में है। 

ओबामा ने कहा, 'मिस्त्र के लोगों के अपने सार्वभौम अधिकार हैं। इसमें शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने, अभिव्यक्ति की आजादी और अपने भाग्य का फैसला करने के अधिकार शामिल हैं। ये सभी मानवाधिकार हैं और अमेरिका इन अधिकारों के लिए कहीं भी खड़ा रहेगा।'

कश्मीर घाटी में टूटने लगा हुर्रियत नेता गिलानी का तिलिस्म

श्रीनगर, जागरण संवाददाता : घाटी के लोग अब अलगाववादी नेताओं से तंग आ चुके हैं। यही कारण है अब उनकी किसी कॉल का असर नहीं हो रहा है। शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अपने एक करीबी साथी गुलाम मोहम्मद भट की गिरफ्तारी के खिलाफ जुमे की नमाज के बाद स्थानीय मस्जिदों के बाहर प्रदर्शन करने का आह्वान किया था, लेकिन लोगों ने उसे अनसुना कर दिया। मस्जिदों में जुमा की नमाज अता करने के बाद लोग अपने घर चले गए। यहां तक कि डाउन-टाउन में भी गिलानी की कॉल का कोई असर नहीं दिखा। नौहट्टा स्थित एतिहासिक जामिया मस्जिद में भी जुमा की नमाज पढ़कर लोग शांतिपूर्वक वहां से चले गए। गौरतलब है कि जून 2010 से शुरू होने वाली क्विट कश्मीर मूवमेंट के दौरान गिलानी ने हड़ताली कैलेंडरों का एक न थमने वाला सिलसिला शुरू कर पांच महीनों तक लोगों को हड़ताल करने पर मजबूर कर दिया था।

भ्रष्टाचार मिटाने को बदलना होगा सिस्टम

Jan 29, 10:42 am
औरंगाबाद। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि देश में बदलाव लाने के लिए नौजवान अपने जीवन के 10 साल राजनीति को दें। उन्होंने कहा कि लोग भ्रष्टाचार की शिकायत करते है लेकिन इसे खत्म करने के लिए राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश नहीं करते। राजनीतिक तंत्र में खराबी है और इसे बदलने के लिए युवाओं की सहभागिता की जरूरत है।
महाराष्ट्र के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन औरंगाबाद पहुंचे राहुल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राजनीतिक दलों में लोकतंत्र का अभाव है जिसके कारण भ्रष्टाचार जैसी बुराइयां पैदा हुई है। राहुल ने कहा कि बदलाव के दो ही तरीके है एक तो भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, उन्हे 20 साल के बजाय छह महीने में सजा मिले और दूसरा तरीका है राजनीतिक व्यवस्था को बदलना। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए दोनों तरीकों का इस्तेमाल करना होगा।
गांधी ने कहा कि बातचीत करने का वक्त अब खत्म हो गया है अब बदलाव की जरूरत है और इस बदलाव के लिए युवा और कुशल लोग हमारे साथ जुड़े, क्योंकि बदलाव के लिए हमें उनकी जरूरत है।
गांधी ने कहा कि मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि 10 साल बाद आपको अपने निर्णय पर गर्व होगा और देश की राजनीति एक नई दिशा में गतिमान हो जाएगी। युवक कांग्रेस में चुनाव के मुद्दे पर गांधी ने कहा कि लोग कह रहे है कि चुनाव में वही लोग जीतेंगे जो बड़े नेताओं या प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार होंगे। गांधी ने कहा कि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो आंतरिक लोकतंत्र को बढ़ावा दे रही है।
अजंता-एलोरा की गुफाओं में मौजूद ऐतिहासिक चित्रों को भारत की कार्यक्षमता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि यह गुफाएं इस बात का ऐलान करती है कि हमारे देश में किस स्तर का काम करने की क्षमता है।
राहुल युवाओं को राजनीति से जोड़ने के अपने उद्देश्य के तहत दोपहर में कोंकण क्षेत्र के लिए रवाना होंगे।
राहुल गांधी ने तेल माफिया द्वारा महाराष्ट्र में अतिरिक्त कलेक्टर यशवंत सोनवाणे की हत्या पर दुख जताते हुए आज कहा कि इस तरह की घटनाएं फिर नहीं होनी चाहिए और भ्रष्टाचार के मामलों में छह महीने के अंदर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तेल माफिया द्वारा सोनवाणे की हत्या से वह स्तब्ध रह गए थे। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में कदम उठाए जाएं ताकि ये फिर न हो। उन्होंने कहा कि हमें इस बात को देखना होगा कि यह घटना क्यों हो रही है। हमें इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि यह दुबारा नहीं हो

प्रदेश महासचिव कुलजीत चहल पर पार्टी और वरिष्ठ नेताओं की छवि धूमिल करने के गंभीर आरोप

प्रदेश महासचिव कुलजीत चहल पर प्रदेश महासचिव कुलजीत चहल पार्टी और वरिष्ठ नेताओं की छवि धूमिल करने के गंभीर आरोप बीते 20 साल से सत्ता का बनवा...